दारा शिकोह, ऐसा मुग़ल शहजादा जिसकी कब्र को ढूंढ रही है मोदी सरकार।

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 भारत की सरकार इन दिनों शाहजहां के बड़े शहजादे दारा शिकोह की कब्र को तलाश कर रही है।

उस समय के इतिहासकारों के लेखन और मिले दस्तावेजों से पता चला है कि दारा शिकोह को दिल्ली में स्थित हुमायूं के मकबरे में ही कहीं दफन किया गया था।
भारत सरकार ने कब्र की पहचान के लिए एक कमेटी गठित कि है जो कला-वास्तुकला और साहित्य के आधार दारा शिकोहा कि कब्र कि पहचान कर सके।

शाहजहां के सबसे बड़े पुत्र दारा शिकोह थे, और मुगल शासन के उत्तराधिकारी भी दारा शिकोह ही थे। शाहजहां के बाद दारा शिकोह को ही राजा बनना था।
लेकिन शाहजहां कि बीमारी के बाद उनके दूसरे पुत्र औरंगजेब ने बड़ी चालाकी से अपने पिता का सिंहासन हड़प लिया और अपने पिता को आगरा के किले में कैद कर बंदी बना लिया था।
औरंगजेब ने अपने पिता का सिंहासन छिनने के बाद खुद को भारत का बादशाह घोषित कर दिया, और सिंहासन की लड़ाई में दारा शिकोह और औरंगजेब का युद्ध हुआ।जिसमें दारा शिकोहा की हार हुई और उसको जले भेज दिया गया।

मोहम्मद सालेब कम्बोह लाहौरी शाहजहां के शाही इतिहासकार थे, जिन्होंने अपनी पुस्तक शाहजहां नामा में बताया है जब दारा शिकोह को बंधी बनाकर दिल्ली लाया गया, तब उन्हें बुरी हालत मे मैले वस्त्र में ही लाया गया था। उन्हें बागी की तरह बुरी हालत में हाथी पर खिज़राबाद ले जाया गया। उन्हें एक बहुत ही गंदी और अंधेरी जगह मे रखा गया, और कुछ समय बाद उनके लिए मौत की सजा का आदेश दे दिया।
उन्होंने अपनी पुस्तक मे लिखा है कि कुछ जल्लाद जेल में उनका कत्ल करने के लिए आए और दारा शिकोह के गले पर खंजर से वार करके उनकी हत्या कर दी। बाद मे खून से लथपथ उनके मृत शरीर को हुमायूं के मकबरे में दफना दिया गया।

दारा शिकोह की कब्र को पहचान है बहुत कठिन।
हुमायूं के विशाल मकबरे में उसके अतिरिक्त यहाँ और भी कब्रें हैं जिनको पहचान पाना बड़ा ही मुश्किल काम है। केवल हुमायूं की ही ऐसी कब्र है जिसकी अब तक पहचान हो पायी है।
पुरातत्व डिपार्टमेंट के पूर्व प्रमुख Dr. Syed Jamal का कहना है कि “यहां तकरीबन 150 कब्रें हैं जिनमें यह पहचान पाना बड़ा मुश्किल काम है कि इसमें दारा शिकोह की कब्र कौन सी है।
उन्होंने यह भी बताया कि वो वहाँ पर बनी कब्रों का निरीक्षण करेंगे और उन कब्रों के बने हुए डिजाइन को अच्छी तरह से देखेंगे, उन पर अगर कुछ लिखा होगा तो उसकी जांच करेंगे। हर तरह से दारा शिकोह की कब्र को पहचानने का प्रयास किया जाएगा।

क्यों है मोदी सरकार को दारा की कब्र की तलाश?
दारा शिकोह शाहजहां के बड़े पुत्र के रूप में परंपरा के अनुसार बादशाह के पद पर उत्तराधिकारी थे। वो भारत मे ऐसा बादशाह बनने का सपना देखते थे, जो बादशाहत के साथ अपने साम्राज्य में शांति और न्याय ला सके। उनका झुकाव हिन्दू धर्म की तरफ भी था जिसके कारण हिन्दू भी उन्हें पसंद करते थे। वो सभी धर्मों को एक समान नजरों से देखते थे। मिली जानकारी के अनुसार दारा अपने समय के माने हुए प्रमुख हिन्दुओं, मुस्लिम सूफियों, बौद्ध, जैनियों और ईसाईयों के पास बैठ कर उनसे धार्मिक विचारों पर सलाह लेते थे।

बनारस से उन्होंने हिन्दू पंडितों को बुला कर उनसे हिन्दू धर्म के उपनिषदों का फारसी भाषा मे अनुवाद करवाया। उपनिषदों का अनुवाद फारसी भाषा में होने के बाद फारसी अनुवाद यूरोप तक पहुँचा और वहाँ उनका लैटिन भाषा मे अनुवाद हुआ। जिस कारण से उपनिषद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हो गए।
दारा शिकोह का स्वभाव काफी उदार था। जितना वो मुसलमानों के साथ उदार थे उतना ही वो अन्य धर्मों के लोगों के साथ भी उदार थे। उनकी इस उदार नीति के कारण हिन्दू भी उन्हे बहुत पसंद करते थे।

कुछ इतिहासकारों का मानना है के अगर औरंगजेब की जगह दारा शिकोह गद्दी पर बैठा होता तो भारत कि दशा कुछ और ही होती।

हिन्दू विचारधारा का संगठन RSS, माननीय प्रधानमंत्री Narendra Modi और BJP ने भारत में मुगल शासकों के काल को भारत ‘हिन्दुओं की गुलामी का दौर’ कहा है।
आज के इस काल में मुगल शासकों के दौर को और मुगल बादशाह के द्वारा घटित घटनाओं को आज भारत के मुसलामानों के खिलाफ़ नफरत पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

लेकिन अब यह बताने की कोशिश कि जाएगी कि दारा शिकोह जैसे भी मुस्लमान हैं जो भारत कि मिट्टी में घुल गए हैं। और दारा शिकोह कि तरह ही उदार हैं जिनमें भाइचारे की भावना है।

क्या करेगी मोदी सरकार दारा की कब्र का?
मोदी सरकार को दारा के उदार चरित्र से काफी प्रभावित हैं , और वो दारा को आदर्श मानते हैं। इसलिए उनके इस उदार चरित्र से प्रभावित हो कर वो इसे मुसलामानों के लिए भी आदर्श बनाना चाहती है।
उनके इस उदार विचारों को उजागर करने के लिए हर संभव है कि दारा की कब्र की पहचान होने के बाद इस मुगल शहजादे कि याद में कोई उत्सव या कार्यक्रम शुरू किया जा सके।
BJP पार्टी के नेता Syed Zafar Islam का मानना है कि “दारा एक बहुत ही उदार नीति के व्यक्ति थे उन्होंने सभी धर्मों का अध्ययन किया और सभी धर्मों का आदर किया। उन्होंने शांति अभियान भी चलाया, वे सभी तरह के धर्मों को साथ लेकर चलने वाले इंसान थे। आज के इस मुस्लिम समाज में दारा जैसी अच्छी सोच वाले लोगों की जरूरत है”।

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